सरपंच पति और उपसरपंच पति की कथित मौजूदगी व दखल पर ग्रामीण मुखर
कार्यवाही रजिस्टर, उपस्थिति पंजी और फोटो-वीडियो की जांच की मांग
by.अविनाश वाधवा

तिल्दा-नेवरा। पंचायत की बैठक व कार्यवाही पर पंचायत प्रतिनिधियों के दखलंदाजी के आरोप का बड़ा मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर जिला ,तिल्दा जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत टंडवा की मासिक बैठकों में कथित तौर पर निर्वाचित प्रतिनिधियों के पतियों के हस्तक्षेप का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच पति एवं उपसरपंच पति पंचायत की बैठकों में नियमित रूप से मौजूद रहकर चर्चा और निर्णय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब पंचायत का संचालन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को करना है, तो बैठक की कार्यवाही में अन्य व्यक्तियों की कथित सक्रिय भूमिका क्यों दिखाई दे रही है?
पहले शिकायत, अब जांच की मांग
ग्रामीणों का दावा है कि मामले को लेकर ग्राम पंचायत सचिव एवं संबंधित CEO के समक्ष पूर्व में लिखित शिकायत प्रस्तुत की जा चुकी है। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने अब CEO जिला पंचायत रायपुर और कलेक्टर रायपुर से मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।
रजिस्टर खोलिए, तस्वीर साफ हो जाएगी
ग्रामीणों ने पंचायत की पूर्व मासिक बैठकों के कार्यवाही रजिस्टर, उपस्थिति पंजी तथा उपलब्ध फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दस्तावेज और रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि बैठकों में कौन उपस्थित रहा और पंचायत की कार्यवाही में किसकी क्या भूमिका रही।
निर्वाचित प्रतिनिधि या परिजन—किसके हाथ में पंचायत की कमान?
ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की संस्था है। ऐसे में यदि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पंचायत की बैठक, निर्णय अथवा कार्यवाही को प्रभावित करने की बात सामने आती है तो उसकी जांच आवश्यक है। ग्रामीणों ने जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
अब निगाह प्रशासन पर: शिकायतों और ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कब शुरू करते हैं और पंचायत की बैठकों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
नोट: सरपंच पति एवं उपसरपंच पति पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

